मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे प्रसिद्ध और उन्नत नगर माना जाता है। यह नगर अपनी अद्भुत नगर योजना, उत्कृष्ट जल निकासी प्रणाली और सुव्यवस्थित सामाजिक जीवन के लिए विश्व-विख्यात है। “मोहनजोदड़ो” का अर्थ है—मृतकों का टीला। इस लेख में हम मोहनजोदड़ो का इतिहास, खोज, नगर संरचना और उसकी प्रमुख विशेषताओं को विस्तार से समझेंगे।
मोहनजोदड़ो की खोज
मोहनजोदड़ो की खोज 1922 ई. में हुई। इस स्थल के उत्खनन से सिंधु घाटी सभ्यता की उन्नत अवस्था के ठोस प्रमाण सामने आए।
खुदाई में मिले पक्के मकान, नालियाँ, स्नानागार और मुहरें यह सिद्ध करती हैं कि यह नगर अपने समय से बहुत आगे था।
भौगोलिक स्थिति
मोहनजोदड़ो वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के तट पर स्थित है। नदी के निकट होने के कारण यहाँ कृषि, व्यापार और जल आपूर्ति की सुविधाएँ विकसित थीं।
मोहनजोदड़ो का नगर नियोजन
मोहनजोदड़ो की नगर योजना इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
प्रमुख बिंदु
- नगर ग्रिड प्रणाली पर आधारित
- सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं
- नगर दो भागों में विभाजित—दुर्ग क्षेत्र और निचला नगर
- पकी हुई ईंटों का प्रयोग
यह व्यवस्था किसी मजबूत प्रशासनिक नियंत्रण का संकेत देती है।
दुर्ग क्षेत्र (Citadel)
दुर्ग क्षेत्र नगर का ऊँचा भाग था।
दुर्ग क्षेत्र की विशेषताएँ
- ऊँचे टीले पर निर्मित
- मोटी दीवारों से घिरा
- धार्मिक और प्रशासनिक भवन
- महान स्नानागार की उपस्थिति
संभावना है कि यहाँ शासकीय और धार्मिक गतिविधियाँ होती थीं।
महान स्नानागार
महान स्नानागार मोहनजोदड़ो की सबसे प्रसिद्ध संरचना है।
विशेषताएँ
- आयताकार आकार
- चारों ओर कमरे
- पक्की ईंटों से निर्मित
- जल निकासी की उत्कृष्ट व्यवस्था
इतिहासकारों के अनुसार यह धार्मिक अनुष्ठानों और सामूहिक स्नान के लिए प्रयोग होता था।
निचला नगर
निचला नगर आम जनता का आवासीय क्षेत्र था।
निचले नगर की विशेषताएँ
- व्यवस्थित मकान
- चौड़ी सड़कें
- घरों में स्नानघर
- ढकी हुई नालियाँ
यह दर्शाता है कि सामान्य जनजीवन भी अत्यंत सुव्यवस्थित था।
मकानों की बनावट
मोहनजोदड़ो के मकान अत्यंत वैज्ञानिक ढंग से बनाए गए थे।
मकानों की विशेषताएँ
- एक या दो मंज़िला
- आंगन युक्त
- निजी कुएँ
- खिड़कियाँ गलियों की ओर
इससे गोपनीयता, स्वच्छता और वायु संचार बना रहता था।
जल निकासी प्रणाली
मोहनजोदड़ो की जल निकासी प्रणाली अपने समय की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों में से एक थी।
जल निकासी की विशेषताएँ
- ढकी हुई नालियाँ
- हर घर से जुड़ी नालियाँ
- नियमित सफाई की व्यवस्था
- गंदे पानी का नगर से बाहर निकास
आज के कई आधुनिक शहर भी ऐसी व्यवस्था से पीछे हैं।
आर्थिक जीवन
मोहनजोदड़ो की अर्थव्यवस्था कृषि और व्यापार पर आधारित थी।
प्रमुख गतिविधियाँ
- गेहूँ, जौ, कपास की खेती
- हस्तशिल्प और मनका निर्माण
- आंतरिक और विदेशी व्यापार
- मुहरों का प्रयोग
मेसोपोटामिया से व्यापार के प्रमाण भी मिले हैं।
सामाजिक जीवन
मोहनजोदड़ो का समाज शांतिप्रिय और संगठित था।
सामाजिक विशेषताएँ
- वर्गभेद के कम प्रमाण
- स्त्री-पुरुष दोनों की भूमिका
- अनुशासित जीवन शैली
भव्य राजमहलों या विशाल सैन्य ढाँचों का अभाव शांत समाज की ओर संकेत करता है।
धार्मिक जीवन
मोहनजोदड़ो में धार्मिक आस्थाओं के भी प्रमाण मिले हैं।
धार्मिक मान्यताएँ
- मातृदेवी की पूजा
- पशुपति (आदि शिव) की आराधना
- जल और स्नान की पवित्रता
- पशु और वृक्ष पूजा
महान स्नानागार धार्मिक महत्व को दर्शाता है।
कला और शिल्प
मोहनजोदड़ो कला और शिल्प का भी केंद्र था।
प्रमुख कलाकृतियाँ
- कांस्य की नर्तकी
- पत्थर की मूर्तियाँ
- मिट्टी के खिलौने
- मनके और आभूषण
ये वस्तुएँ लोगों की सौंदर्य-बोध और तकनीकी दक्षता को दिखाती हैं।
मोहनजोदड़ो का पतन
मोहनजोदड़ो के पतन के सटीक कारण ज्ञात नहीं हैं।
संभावित कारण
- बार-बार आने वाली बाढ़
- जलवायु परिवर्तन
- सिंधु नदी का मार्ग बदलना
- प्राकृतिक आपदाएँ
इन कारणों से नगर धीरे-धीरे उजड़ गया।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- महान स्नानागार
- उन्नत जल निकासी
- ग्रिड आधारित नगर योजना
- पकी ईंटों का प्रयोग
UPSC, SSC, Railway, B.Ed और TET में यहाँ से प्रश्न पूछे जाते हैं।
निष्कर्ष
मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता का गौरवशाली नगर था। इसकी उन्नत नगर योजना, सामाजिक व्यवस्था और तकनीकी दक्षता यह सिद्ध करती है कि प्राचीन भारत अत्यंत विकसित था। मोहनजोदड़ो आज भी इतिहासकारों और छात्रों के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।









